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    Friday, 20 September 2019

    Dard Shayari In Hindi Lovers Hindi Shayari

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    दूजों को कब हम रोते हैं।अपने अपने गम होते हैं।।
    साथ मेरे होता नही वो तो,दर्द भरे मौसम होते हैं।
    Dujo ko kab hum rote he,
    Apne apne gum hote he.
    Sath mere hota nahi vo to,
    Dard bhre mosam hote he.
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    खुश्क नज़र को आंक रहे हो,भीतर भी सावन होते हैं।
    चटक रंग या रेशमी देखो,भीगे सब दामन होते हैं।
    Khushk najar ko aank rahe ho,
    Bhitar bhi savn hote he...!
    Chhtk rang ya reshmi Dekho,
    Bhige sab damn hote he.
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    शोर शराबा अब यही बाकि,जब घर में मातम होते हैं।
    रंज नही बस हँसी ख़ुशी हो,ऐसे किस्से कम होते हैं।
    Shor shraba ab yahi baki,
    Jab ghar me matam hote he.
    Ranj nahi bas hashi Khushi ho,
    Aese kisse kam hote he.
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    अपनी ख़्वाहिशों को हम जगाकर रोए थे कभी,कभी जज़्बातों को छुपाकर रोने को जी चाहता है,
    Apni khvahisho ko hum jgakar roye the Kabhi,
    Kabhi jajbato ko chupakar time ko ji chahta he.
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    ज़ख्म जो अब तक मिले है,
              मुझे काबिज़ जिन्दगी से.
    वो उसी शख़्श को दिखा कर,
           रोने को जी चाहता है,
    Jakhm Jo ab tak mile he,
                  muje kabij jindgi se.
    Vo ushi shkhsh ko dikha Kar,
                   rone ko ji chahta he.
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    चल रहीं हैं साँसें जो उसके बिना अब भी मेरी,इन साँसों में उसे बसाकर रोने को जी चाहता है,
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    कैसी जादूगरी हो गई,जिन्दगी शायरी हो गई।
    ताज मशहूर है आज भी,कत्ल कारीगरी हो गई।
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    बाप चुप चुप से रहना लगा,जब से बिटिया बड़ी हो गई।
    आये अब वो मुझे देखने,साँस जबा आख़िरी हो गई।।
                     डॉ अनु सपन 
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    मुक़म्मल ना हुई जिस इश़्क की दास्ताँ अब तलक,वही किस्सा इस जहाँ को सुनाकर रोने को जी चाहता है,
    उसे अपना बनाने की हसरत थी बसी इस दिल में,उन्ही हसरतों को फिर जगा कर रोने को जी चाहता है,
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    जल रहा हूँ मुद्दत से उसी के बनाये यादों के श़हर में,लगी इस आग को अब बुझा कर रोने को जी चाहता है,
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    नही चाहता किसी और का होकर जीना मैं तुम्हारे बिना,हालातों से लड़ तुझे पास बुलाकर रोने को जी चाहता है,
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    आओ ना कि ख़त्म करलें सारे ग़िले-शिकवे को हम,आज संदीप का तुझे गले लगाकर रोने को जी चाहता है,
                                 ✍ संदीप सिंह ।  

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